देहरादून,
संस्कृत विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति डा. सुधा रानी पांडे ने कहा कि हिंदी केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और सभ्यता की आत्मा है। हिंदी को अपनाना ही अपने अस्तित्व, संस्कृति और पहचान को सुरक्षित रखना है।
वह आज ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी में आयोजित हिंदी भाषा सम्मेलन को संबोधित कर रही थीं। डॉ. पांडे ने कहा कि वैश्विक दौर में अंग्रेजी और अन्य विदेशी भाषाओं का ज्ञान आवश्यक है, लेकिन मातृभाषा से दूरी बनाना अपने ही अस्तित्व से दूर जाने जैसा है। जो अपनी भाषा को भूल जाता है, वह अपनी पहचान खो देता है।
इस अवसर पर इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम के राज्यभाषा विभाग प्रमुख डा. सोमेश्वर पांडे ने कहा कि हिंदी आज विश्व मंच पर भारतीयता की आवाज बनकर उभर रही है। तकनीकी और डिजिटल युग में इसका दायरा और भी व्यापक हुआ है।
कार्यक्रम का आयोजन विश्वविद्यालय के काव्यांजलि क्लब ने किया। संचालन क्लब अध्यक्ष सक्षम पंत ने किया। इस अवसर पर डा. सुमन नैथानी, डा. ए. एस. शुक्ला सहित बड़ी संख्या में शिक्षाविद और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।



