देहरादून।
राज्यपाल ले.जन. (से.नि.) गुरमीत सिंह (PVSM, UYSM, AVSM, VSM) एवं शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने बुधवार को वर्चुअल स्टूडियो से “शिक्षा की बात” कार्यक्रम का शुभारंभ किया। यह कार्यक्रम समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत विभिन्न राजकीय विद्यालयों के छात्र-छात्राओं से संवाद हेतु आयोजित किया गया।
कार्यक्रम के प्रारंभ में राज्यपाल ने राज्य के सभी शिक्षकों और विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वर्तमान युग में तकनीकी शिक्षा, क्रिटिकल थिंकिंग, रचनात्मकता, संचार कौशल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की समझ अनिवार्य है। राज्यपाल ने शिक्षकों से आह्वान किया कि वे पूरे मनोयोग से पठन-पाठन में जुटें, ताकि उत्तराखण्ड को शैक्षिक दृष्टि से सशक्त राज्य बनाया जा सके।
राज्यपाल ने कहा कि आज शिक्षक की भूमिका केवल पढ़ाने तक सीमित नहीं, बल्कि छात्रों को आत्मनिर्भर, व्यवहारिक और जिम्मेदार नागरिक बनाना भी है। उन्होंने विद्यार्थियों को नशे से दूर रहने की सलाह दी और कहा कि नशा न केवल स्वास्थ्य को नष्ट करता है, बल्कि सपनों को भी समाप्त कर देता है।
इस अवसर पर छात्र-छात्राओं ने राज्यपाल से विभिन्न विषयों पर प्रश्न पूछे। गैरसैण की कक्षा-12 की छात्रा कुमारी तुलसी ने 21वीं सदी के कौशलों व सामाजिक योगदान पर प्रश्न किया। टिहरी गढ़वाल के कक्षा-10 के छात्र सौरभ उनियाल ने मानविकी और विज्ञान विषयों की उपयोगिता पर सवाल रखा। रुद्रपुर की कक्षा-9 की छात्रा काजल ने व्यावसायिक शिक्षा की प्रासंगिकता पर प्रश्न किया, जबकि पौड़ी गढ़वाल की कक्षा-8 की छात्रा प्रियंका ने कृषि एवं बागवानी शिक्षा से राज्य को होने वाले लाभ पर सवाल किया। राज्यपाल ने सभी प्रश्नों का उत्तर देते हुए विद्यार्थियों को उनके रुचि अनुसार श्रेष्ठ बनने की प्रेरणा दी।
कार्यक्रम में सचिव विद्यालयी शिक्षा रविनाथ रामन, निदेशक वंदना गर्त्याल, अजय कुमार नोडियाल, अपर निदेशक पदमेन्द्र संकलानी, कुलदीप गैरोला, संयुक्त निदेशक जे.पी. काला सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. बी.पी. मैंदोली ने किया। अंत में राज्य परियोजना निदेशक दीप्ति सिंह ने राज्यपाल एवं सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्ति





