देहरादून,। आचार्य सौरभ सागर महाराज ने कहा कि एक सच्चा जैन वही है, जो अपने कर्मों से जिन के मार्ग का अनुसरण करे। केवल नाम से नहीं, बल्कि आचरण और साधना से जैन होना ही वास्तविक धर्म है। जैन धर्म प्राणी मात्र के कल्याण और मनुष्यता के भाव पर आधारित है। सदमार्ग अपनाकर ही कल्याण के पथ पर अग्रसर हुआ जा सकता है।
वे बुधवार को माजरा स्थित जैन मंदिर में आयोजित नव दिवसीय जिनेन्द्र महाअर्चना के अवसर पर प्रवचन दे रहे थे। यह आयोजन सकल दिगम्बर जैन समाज, 31वीं श्री पुष्प वर्षा योग समिति एवं श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन पंचायती मंदिर की ओर से किया जा रहा है।
आचार्य ने कहा कि जैन धर्म आत्म साक्षात्कार और व्यक्तिगत प्रयास के बल पर वासनाओं पर विजय प्राप्त कर मुक्ति का मार्ग दिखाता है। इस अवसर पर राजेश जैन व अर्चना जैन ने आचार्य से आहार चर्चा की तथा भक्तों ने सामूहिक रूप से महाराज को आहार ग्रहण कराया।
इससे पूर्व श्री जिन सहस्रनाम महामंडल विधान एवं विश्व शांति महायज्ञ बड़े उत्साह और श्रद्धा से संपन्न हुआ। अभिषेक, शांति धारा और नित्य नियम-पूजन के बाद विधान की शुरुआत हुई। विधानाचार्य संदीप जैन सजल (हस्तिनापुर) ने मार्गदर्शन किया जबकि इंदौर के संगीतकार विक्की की संगीतमय प्रस्तुति ने श्रद्धालुओं को आनंदित किया।
माजरा मंदिर में श्री जी के आगे चांदी की बंदनवार अमित जैन (सरधना) द्वारा अर्पित की गई। संध्याकालीन बेला में गुरुभक्ति व महाआरती का आयोजन हुआ।
इस अवसर पर अध्यक्ष दिनेश जैन, प्रवीण जैन, अमित जैन, संदीप जैन, मुख्य संयोजक अमित जैन, सचिन जैन, मुकेश जैन, मधु जैन सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।





